हापुड़ में ‘ऐशआथी सक्षम’ महिला कौशल विकास कार्यक्रम का शुभारंभ, छह माह का निःशुल्क प्रशिक्षण देकर महिलाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर।

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दिनांक:20/07/2026

रिपोर्ट by: संवादाता इस्तेकार चौधरी

हापुड़ में ‘ऐशआथी सक्षम’ महिला कौशल विकास कार्यक्रम का शुभारंभ, छह माह का निःशुल्क प्रशिक्षण देकर महिलाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर।

हापुड़। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हापुड़ में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल और वाऴ फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में “ऐशआथी सक्षम (AshAthi Saksham – Skills for Self Reliance)” महिला कौशल विकास कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके बाद कौशल विकास केंद्र का उद्घाटन रिबन काटकर किया गया। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं, छात्राओं, शिक्षकों, चिकित्सकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

इस अवसर पर वाऴ फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट की संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी तथा सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की वाइस चेयरपर्सन श्रीमती रम्या रामचंद्रन ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान दिलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति भी तेज होती है। उन्होंने संस्था की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई।कार्यक्रम में संस्थान की प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉ. चरणजीत सिंह अहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. सहगल, डायरेक्टर रघुवर दत्त, जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन, सामुदायिक चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए. रेवंत कुमार सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, चिकित्सक, शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी सक्रिय भूमिका निभाना है। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित प्रशिक्षण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है।डॉ. ए. रेवंत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिला सशक्तिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ समाज के विकास को भी गति देता है।कार्यक्रम के तहत महिलाओं के लिए छह माह का निःशुल्क प्रमाणपत्र आधारित प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसमें कंप्यूटर एप्लीकेशन कोर्स के अंतर्गत कंप्यूटर बेसिक्स, इंटरनेट, ई-मेल, एमएस ऑफिस और डिजिटल कार्यकुशलता का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं ब्यूटी एवं वेलनेस कोर्स में स्किन केयर, हेयर केयर, प्रोफेशनल मेकअप, मेहंदी आर्ट, सैलून प्रबंधन और ग्राहक सेवा जैसे विषयों की व्यावहारिक जानकारी विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा करने वाली प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

कार्यक्रम में शामिल महिलाओं और छात्राओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित करने में मदद करेंगे।कार्यक्रम का संचालन सामुदायिक चिकित्सा विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. कोनिका गुप्ता ने किया। समापन के अवसर पर सभी अतिथियों ने प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।संस्थान के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन ने अपने संदेश में कहा कि कौशल आधारित शिक्षा महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल आने वाले समय में हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में स्थापित होगी।

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