अपने बच्चों में सेवा, साधना और संस्कार की भावना जाग्रत करना समाज की जिम्मेदारी : डॉ. आशीष गौतम।

SHARE:

दिनांक:24/08/2026

रिपोर्ट by: संवादाता इस्तेकार चौधरी

अपने बच्चों में सेवा, साधना और संस्कार की भावना जाग्रत करना समाज की जिम्मेदारी : डॉ. आशीष गौतम।

हापुड़। जीएस विश्वविद्यालय परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, शौर्य, संघर्ष, स्वराज और आदर्श चरित्र पर आधारित विश्वविख्यात ऐतिहासिक महानाट्य ‘जाणता राजा’ का भव्य एवं प्रभावशाली मंचन किया गया। ऐतिहासिक प्रसंगों, प्रभावशाली संवादों और जीवंत प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकारों ने शिवाजी महाराज के संघर्षपूर्ण जीवन और राष्ट्रहित में उनके योगदान को मंच पर साकार किया। कार्यक्रम ने उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को इतिहास से जुड़ने तथा राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को समझने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का संचालन जीएस विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुबाला ने किया। इस दौरान दिव्य प्रेम सेवा मिशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गौतम ने कहा कि बच्चों और युवाओं में केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सेवा, साधना, संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि वह नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, इतिहास और महान व्यक्तित्वों के जीवन से परिचित कराए, ताकि युवा अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर देश और समाज के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार द्वारा प्रतिवर्ष ‘जाणता राजा’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष भी यह ऐतिहासिक महानाट्य गाजियाबाद में 22 से 28 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘जाणता राजा’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रभावना और प्रेरणा का ऐसा माध्यम है, जो दर्शकों को छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन मूल्यों से जोड़ता है।उन्होंने बताया कि महानाट्य ‘जाणता राजा’ भारत के अलावा अमेरिका और इंग्लैंड सहित दुनिया के विभिन्न देशों में 1300 से अधिक बार मंचित हो चुका है और प्रत्येक वर्ष डेढ़ लाख से अधिक दर्शक इसका अवलोकन करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय इतिहास की वास्तविक घटनाओं और महान व्यक्तित्वों के संघर्ष से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।नगर पालिका पिलखुवा के अध्यक्ष विभू बंसल ने कहा कि ‘जाणता राजा’ इतिहास को मंच पर जीवंत करने वाली ऐसी प्रभावशाली प्रस्तुति है, जो युवाओं को भारत के गौरवशाली अतीत से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता, मातृभूमि के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की प्रेरणा देता है। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प, साहस और राष्ट्रहित की भावना के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।विभू बंसल ने कहा कि इतिहास केवल पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं होना चाहिए। इतिहास से प्रेरणा लेकर वर्तमान को बेहतर बनाना और भविष्य के लिए मजबूत सामाजिक एवं राष्ट्रीय आधार तैयार करना ही ऐसे आयोजनों की वास्तविक सार्थकता है। उन्होंने ‘जाणता राजा’ के मंचन को विद्यार्थियों और युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक बताया।कार्यक्रम के दौरान मंचन में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से स्वराज की स्थापना, संघर्ष, नेतृत्व, साहस और राष्ट्रहित के लिए समर्पण जैसे विषयों को दर्शकों के सामने रखा गया। महानाट्य की प्रस्तुति ने परिसर में मौजूद दर्शकों को इतिहास के महत्वपूर्ण कालखंड से रूबरू कराया।इस अवसर पर जीएस विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. यतीश अग्रवाल, जीएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. शरद गोयल, सीएचए डॉ. एस. कुमार, उपनिदेशक मनोज शिशोदिया, एसएन सिंह, रवि बंसल, डॉ. ललिता, डॉ. भास्कर, डॉ. अरुण, डॉ. उदय जोशी, मोहित, रोनाल्ड, मनी, अविनभ, संचान, सुखवीर चौहान, सचिन तोमर, विकास पुंडीर सहित विश्वविद्यालय एवं अस्पताल के अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।जाणता राजा’ के मंचन ने यह संदेश भी दिया कि नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ अपने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रनायकों के आदर्शों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ऐतिहासिक महानाट्य की प्रस्तुति को सराहा और इसे युवाओं में राष्ट्रभावना, संस्कार तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने वाला प्रेरणादायक आयोजन बताया।

Read More