दिनांक:26/08/2026
ब्यूरो रिपोर्ट।
वायरल वीडियो से गरमाई सियासत, सरकारी स्कूल के मामले में आप नेता पर एफआईआर के बाद उठे कई सवाल।
हापुड़। सरकारी स्कूल की कथित बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया है। वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सीएम चौहान के खिलाफ गाजियाबाद के भोजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे लेकर सरकार और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।पूरा विवाद एक ऐसे वीडियो से जुड़ा है, जिसमें एक सरकारी विद्यालय के परिसर और वहां की कथित व्यवस्थाओं को रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में स्कूल की स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए गए और परिसर में कथित तौर पर शराब की बोतल मिलने का दावा भी किया गया। वीडियो सार्वजनिक होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और देखते ही देखते राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

इसके बाद पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि भोजपुर थाने में दर्ज एफआईआर में विद्यालय से संबंधित समायोजन के मुद्दे के साथ स्कूल स्टाफ के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों और वायरल वीडियो में किए गए दावों को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।मामले में आम आदमी पार्टी ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय उन्हें सामने लाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने विद्यालय के समायोजन और एफआईआर में लगाए गए आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।उधर, सीएम चौहान ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी शिक्षक अथवा कर्मचारी को बदनाम करना नहीं था। उनके मुताबिक, स्कूल की वास्तविक स्थिति को सामने रखने के लिए वीडियो बनाया गया था। चौहान ने आरोप लगाया कि जिन व्यवस्थागत समस्याओं को सार्वजनिक किया गया, उनका समाधान करने के बजाय मामले को उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तक पहुंचा दिया गया।

हालांकि, इस पूरे प्रकरण का दूसरा पहलू भी सामने आ रहा है। सरकारी विद्यालयों में बिना अनुमति प्रवेश करने, परिसर में रिकॉर्डिंग करने और बच्चों व कर्मचारियों से जुड़े दृश्यों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने को लेकर निर्धारित नियमों का सवाल उठ रहा है। ऐसे में यह जांच का विषय होगा कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया, परिसर में प्रवेश की अनुमति थी या नहीं और रिकॉर्डिंग के दौरान किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।अब मामला दो अलग-अलग सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। पहला सवाल स्कूल की कथित व्यवस्थाओं से जुड़ा है—क्या वीडियो में दिखाई गई स्थिति वास्तव में स्कूल की मौजूदा व्यवस्था को दर्शाती है? दूसरा सवाल वीडियो बनाने और उसे सार्वजनिक करने की प्रक्रिया को लेकर है—क्या इसके लिए निर्धारित अनुमति और नियमों का पालन किया गया था?राजनीतिक तौर पर भी मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि एक तरफ आम आदमी पार्टी इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सामने लाने से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ स्कूल परिसर की व्यवस्था और कर्मचारियों की गरिमा से जुड़े नियमों का मुद्दा उठ रहा है।

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और शिक्षा विभाग की ओर से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत एवं आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है। जांच में वीडियो की परिस्थितियों, लगाए गए आरोपों और एफआईआर में दर्ज बिंदुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।मामले का सच जांच के निष्कर्ष और संबंधित विभाग के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आएगा। फिलहाल वायरल वीडियो ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, जवाबदेही और सोशल मीडिया पर सरकारी संस्थानों की रिकॉर्डिंग को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।डिस्क्लेमर: खबर में उल्लेखित आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए दावों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। किसी भी आरोप की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच या आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही मानी जाएगी।






