दिनांक:29/07/2026
रिपोर्ट by: संवादाता इस्तेकार चौधरी
सिम्स हापुड़ में ओआरएस सप्ताह के तहत चला जागरूकता अभियान, डायरिया से बचाव और बच्चों की सुरक्षा का दिया संदेश।
हापुड़। बच्चों में डायरिया के कारण होने वाले डिहाइड्रेशन की रोकथाम और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड हॉस्पिटल (सिम्स), हापुड़ के बाल रोग विभाग ने ओआरएस सप्ताह के अवसर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान आयोजित किया। दो दिवसीय कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता और व्यवहारिक प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ते हुए मेडिकल विद्यार्थियों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, इंटर्न्स, मरीजों तथा उनके परिजनों को डायरिया से बचाव के प्रभावी उपायों की जानकारी दी गई।अभियान की शुरुआत डिजिटल पोस्टर प्रस्तुति से हुई, जिसमें एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने ओआरएस की सही तैयारी, उसके वैज्ञानिक महत्व, उपयोग की विधि और डायरिया के दौरान शरीर में पानी एवं आवश्यक लवणों की कमी को पूरा करने में उसकी भूमिका पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। विद्यार्थियों ने बताया कि समय पर ओआरएस का उपयोग बच्चों में डिहाइड्रेशन की गंभीर स्थिति को रोकने में अत्यंत प्रभावी साबित होता है। इसके साथ ही स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, संतुलित पोषण और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान बाल रोग विभाग के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल अस्पताल तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाना भी डॉक्टरों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विभाग की नर्सिंग टीम ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डायरिया की स्थिति में समय पर ओआरएस देना कई गंभीर जटिलताओं से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए स्नातकोत्तर विद्यार्थियों द्वारा एक प्रेरक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से लोगों को सरल भाषा में समझाया गया कि डायरिया होने पर घबराने के बजाय तुरंत ओआरएस देना, स्तनपान जारी रखना, पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, हाथों की नियमित सफाई रखना तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से संपर्क करना कितना आवश्यक है। इस प्रस्तुति ने मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल में मौजूद सभी लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके बाद आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी में ओआरएस की सही तैयारी, जिंक थेरेपी, बच्चों के पोषण, स्वच्छ पेयजल, संक्रमण से बचाव और डिहाइड्रेशन प्रबंधन जैसे विषयों को आकर्षक एवं जानकारीपूर्ण तरीके से प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने मेडिकल विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच शैक्षणिक चर्चा को बढ़ावा दिया, वहीं आम लोगों को भी सरल भाषा में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संदेश प्राप्त हुए।पूरा कार्यक्रम बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश कुमार गोयल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अभियान में विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों, सहायक प्रोफेसरों, रेजिडेंट डॉक्टरों, इंटर्न्स, नर्सिंग स्टाफ तथा स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी ने स्वास्थ्य शिक्षा को समाज तक पहुंचाने के इस प्रयास को चिकित्सा सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डायरिया जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारी के प्रति समय पर जागरूकता फैलाना बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है। ऐसे अभियान न केवल लोगों को सही जानकारी देते हैं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम में भी प्रभावी योगदान निभाते हैं।सिम्स हापुड़ लगातार चिकित्सा शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और जनस्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से समाज को जागरूक करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।कार्यक्रम के समापन पर बाल रोग विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की कि डायरिया के लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें, तुरंत ओआरएस का उपयोग करें, पर्याप्त तरल पदार्थ दें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें। विभाग ने संदेश दिया कि समय पर सही उपचार और जागरूकता से डिहाइड्रेशन को रोका जा सकता है तथा हर बच्चे का जीवन सुरक्षित बनाया जा सकता है।







