दिनांक:10/04/2026
रिपोर्ट by: संवाददाता इस्तेकार चौधरी
हापुड़ के SIMS में दुर्लभ “द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला” का सफल ऑपरेशन, चार वर्षीय बच्ची को मिली नई ज़िंदगी।हापुड़ के सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SIMS) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए चार वर्षीय बच्ची के अत्यंत दुर्लभ जन्मजात रोग “द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला” का सफल ऑपरेशन किया है। जटिलता और बेहद कम मामलों में पाए जाने के कारण इस सर्जरी को चिकित्सा जगत में विशेष महत्व दिया जाता है।जानकारी के अनुसार, द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला एक ऐसा जन्मजात विकार है, जिसमें गर्दन के दोनों ओर असामान्य नलिकाएं विकसित हो जाती हैं। ये नलिकाएं त्वचा और शरीर की आंतरिक संरचनाओं के बीच संपर्क बना लेती हैं, जिससे बार-बार संक्रमण, सूजन और पस के स्राव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। समय पर उपचार न मिलने की स्थिति में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और बच्चे के सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती है।

इस जटिल स्थिति में सटीक निदान और पूर्ण सर्जिकल निष्कासन बेहद जरूरी होता है, क्योंकि फिस्टुला का कोई भी हिस्सा यदि शरीर में रह जाए तो भविष्य में इसके दोबारा होने की आशंका बनी रहती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए SIMS के कर्ण, नासिका एवं कंठ (ईएनटी) विभाग की विशेषज्ञ टीम ने अत्यंत सावधानी और आधुनिक तकनीकों के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।सर्जरी के दौरान बच्ची की गर्दन के दोनों ओर मौजूद फिस्टुला पथ को पूरी तरह से हटाया गया, जिससे रोग के पुनः होने की संभावना समाप्त हो गई। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत स्थिर बताई जा रही है और वह चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रही है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर उपचार मिलने से बच्ची अब सामान्य जीवन की ओर बढ़ रही है।

इस सफल सर्जरी में विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश कुमार के नेतृत्व में डॉ. शुभम मित्तल, डॉ. नंदिनी और डॉ. थजाना की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीमवर्क, अनुभव और सटीकता के चलते इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलता मिली।संस्थान प्रबंधन ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए पूरी टीम को बधाई दी है। प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक रघुवर दत्त और चिकित्सा अधीक्षक मेजर जनरल डॉ. सी. एस. आहलूवालिया ने चिकित्सकों की दक्षता और समर्पण की सराहना की।वहीं, संस्थान के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन और उपाध्यक्ष रम्या रामचंद्रन ने भी इस सफलता को संस्थान की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं का प्रमाण बताया और टीम को शुभकामनाएं दीं।

चिकित्सकों ने आम लोगों से अपील की है कि बच्चों में गर्दन पर असामान्य सूजन, बार-बार संक्रमण या किसी भी प्रकार का स्राव दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। समय पर उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।यह उपलब्धि सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हापुड़ में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, उन्नत ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता को दर्शाती है। संस्थान भविष्य में भी जटिल बीमारियों के सफल उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।




