रिपोर्ट/ नाज आलम ( सोर्स एक्स प्लेटफ़ॉर्म )
राज्य सभा चुनाव में रालोद की एकजुटता से पश्चिमी यूपी में सपा को झटका लगा। जयंत चौधरी के निर्देश पर पार्टी के सभी नौ विधायकों ने एक साथ भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया। जयंत बीजेपी के भरोसे पर खरे उतरे।
उत्तर प्रदेश : राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के विधायकों की एकजुटता से भाजपा का उत्साह बढ़ा है तो प्रदेश के मुख्य विरोधी दल सपा को झटका लगा है। अध्यक्ष जयंत चौधरी के निर्देश पर पार्टी के सभी नौ विधायकों ने एक साथ भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया। जयंत इस चुनाव में भाजपा के भरोसे पर खरे उतरे। अब जल्द ही दोनों दलों के बीच गठबंधन की घोषणा और योगी सरकार में रालोद की सहभागिता होने की संभावना जताई जा रही है। रालोद की एकजुटता को जयंत की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
मतदान से पहले सियासी गलियारों में रालोद विधायकों की क्रॉस वोटिंग के कयास लगाए जा रहे थे। कहा जा रहा था कि पार्टी के कुछ विधायक जयंत चौधरी के ‘इंडिया’ गठबंधन से अलग होकर ‘एनडीए’ का हिस्सा बनने के फैसले से नाराज हैं। विधानसभा चुनाव के समय रालोद का सपा के साथ गठबंधन था, जिसमें उसके आठ विधायक चुने गए थे। बाद में खतौली सीट पर हुए उप चुनाव में भी सपा ने रालोद प्रत्याशी का समर्थन किया था, जिसमें भाजपा को हराकर रालोद ने जीत दर्ज की थी।
इस तरह प्रदेश में रालोद के कुल नौ विधायक हो गए। लोकसभा चुनाव से पहले सीटों के बंटवारे पर सपा के साथ कुछ मतभेद होने और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह को ‘भारत रत्न’ देने की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद रालोद के रुख में अचानक बड़ा बदलाव आया।NDA में शामिल होने के औपचारिक एलान से पहले ही रालोद ने राज्यसभा के चुनाव में भाजपा की मदद की।

सूत्रों के अनुसार लोकसभा सीटों और योगी सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने के मुद्दे पर भाजपा व रालोद के बीच सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। रालोद को यूपी में न्यूनतम एक मंत्री पद और लोकसभा की दो से तीन सीटें दी जा सकती हैं। राज्यसभा चुनाव
में रालोद के सभी नौ विधायकों की एकजुटता से भाजपा को लोकसभा चुनाव में सियासी फायदा दिख रहा है। भाजपा पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन गरम न होने में भी रालोद की भूमिका देख रही है। पिछली बार पंजाब के साथ ही पश्चिमी यूपी के भी किसान एमएसपी के मुद्दे पर आंदोलित थे।




