दिनांक:02/08/2026
रिपोर्ट by: संवादाता शराफत सैफी
हापुड़ की राजनीति में बड़ा उलटफेर नगर पालिका अध्यक्ष पुष्पा देवी और पूर्व बसपा नेता श्रीपाल सिंह भाजपा में शामिल, बदले सियासी समीकरण।
हापुड़ जिले की राजनीति में रविवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब नगर पालिका परिषद हापुड़ की अध्यक्ष पुष्पा देवी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से अपना नाता समाप्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ उनके पति एवं लंबे समय से सक्रिय रहे पूर्व बसपा नेता श्रीपाल सिंह ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। राजधानी लखनऊ में आयोजित सदस्यता कार्यक्रम के दौरान भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने दोनों नेताओं का पार्टी में स्वागत किया। इस राजनीतिक बदलाव के बाद हापुड़ के सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और इसे जिले की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

पुष्पा देवी ने वर्ष 2023 के नगर निकाय चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए नगर पालिका परिषद हापुड़ के अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की थी। उनकी जीत उस समय बसपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी गई थी। अब उनके भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक विश्लेषक इसे बसपा के लिए एक बड़ा झटका और भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करने की रणनीति के संदर्भ में इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है।

पूर्व बसपा नेता श्रीपाल सिंह भी हापुड़ की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर हापुड़ सदर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक सक्रियता का परिचय दिया था। वर्षों से जिले की राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी रही है। ऐसे में उनका भाजपा में शामिल होना केवल व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष का भाजपा में आना केवल एक दल परिवर्तन भर नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति, संगठन के विस्तार और स्थानीय नेतृत्व की नई भूमिका पर भी दिखाई दे सकता है। नगर निकाय में जनप्रतिनिधित्व रखने वाले चेहरों का किसी बड़े राजनीतिक दल से जुड़ना चुनावी गणित को प्रभावित करने वाला कदम माना जाता है।

भाजपा लगातार विभिन्न दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पुष्पा देवी और श्रीपाल सिंह का पार्टी में शामिल होना संगठन के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बसपा के सामने जिले में अपने संगठन को फिर से मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है।हापुड़ की राजनीति में इस बदलाव के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य राजनीतिक दल इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह बदलाव भविष्य में अन्य नेताओं के राजनीतिक फैसलों को भी प्रभावित करेगा। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि इस सदस्यता के बाद हापुड़ की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं, जिनका असर आने वाले चुनावी परिदृश्य में स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।





