दिनांक:24/07/2026
हापुड़ से ब्यूरो रिपोर्ट
हापुड़ में रालोद की प्रेसवार्ता से बढ़ी सियासी हलचल, पदों से इस्तीफों के जरिए नेतृत्व पर फैसले का दबाव।
हापुड़। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की जिला इकाई में शुक्रवार को हुई प्रेसवार्ता के बाद जिले की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। संगठन से जुड़े 38 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा को राजनीतिक हलकों में संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी और नेतृत्व पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।प्रेसवार्ता में पार्टी के कुछ नेताओं ने संगठन में लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जून माह में हुए विवाद की जांच पूरी होने के बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इसी के विरोध में पदों से इस्तीफे देने की बात कही गई। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी है और विवाद का समाधान होने पर दोबारा संगठन में सक्रिय होने की बात भी कही गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पदों से इस्तीफा देने वाले नेता स्वयं यह कह रहे हैं कि वे पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं और निर्णय होने के बाद वापस संगठन में लौट सकते हैं, तो यह कदम स्थायी अलगाव से अधिक संगठन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास माना जा सकता है।इस घटनाक्रम ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। यदि विवाद को लेकर असहमति थी, तो उसे संगठन के आंतरिक मंचों पर सुलझाने का प्रयास अधिक प्रभावी हो सकता था। वहीं प्रेसवार्ता के माध्यम से मामला सार्वजनिक होने से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति भी पैदा हो सकती है। राजनीतिक दलों में मतभेद असामान्य नहीं होते, लेकिन उनका समाधान संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत होना ही पार्टी की मजबूती के लिए बेहतर माना जाता है।

फिलहाल रालोद नेतृत्व की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह जांच रिपोर्ट पर क्या निर्णय लेता है और संगठन में चल रहे विवाद का समाधान किस तरह किया जाता है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में नेतृत्व का फैसला ही तय करेगा कि यह मामला केवल अस्थायी असंतोष तक सीमित रहता है या फिर इसका असर जिले में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।






