रिपोर्ट नाज आलम – ( सोर्स एक्स प्लेटफ़ॉर्म )
मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई है, जिसने एडवोकेट कमिश्नर को सर्वे कराने का आदेश दिया था।
उत्तर प्रदेश मथुरा :
मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद के सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई है, जिसने एडवोकेट कमिश्नर को सर्वे का आदेश दिया था। यह ईदगाह मस्जिद मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से एकदम सटी हुई है। इसे लेकर दावा किया जाता है कि यह श्रीकृष्णजन्मभूमि के प्राचीन मंदिर के ऊपर बनी है, जिसे तोड़ दिया गया था। इसी के चलते हिंदू पक्ष ने अर्जी दाखिल की है और मस्दिद के सर्वे की मांग की है। बता दें कि हाल ही में काशी की ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे हुआ था और इसकी रिपोर्ट भी अगले कुछ दिनों में आ सकती है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने 14 दिसंबर 2023 के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण अदालत की निगरानी में कराने पर सहमति जतायी गयी थी। मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर में ऐसी निशानियां हैं, जिससे पता चलता है कि यह एक वक्त में मंदिर था।
पीठ ने कहा कि कुछ कानूनी मुद्दे हैं और उसने सर्वेक्षण के लिए अदालती आयुक्त की नियुक्ति के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष पेश किए ”अस्पष्ट” आवेदन पर सवाल उठाए। पीठ ने हिंदू पक्षों जैसे कि भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और अन्य की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से कहा, ”आप अदालत आयुक्त की नियुक्ति के लिए अस्पष्ट आवेदन नहीं दे सकते। इसका उद्देश्य बहुत स्पष्ट होना चाहिए। आप सब कुछ अदालत पर नहीं छोड़ सकते।”

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न्यायालय ने हिंदू संस्थाओं को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। यह भी स्पष्ट कर दिया कि विवाद से जुड़े मामलों की उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय शाही ईदगाह के अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति देने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली ट्रस्ट शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंधन समिति की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। मस्जिद समिति ने अपनी याचिका में कहा कि उच्च न्यायालय को मुकदमे में किसी भी अन्य विविध आवेदन पर निर्णय लेने से पहले वादपत्र की अस्वीकृति के लिए उसकी याचिका पर विचार करना चाहिए था। समिति ने इस आधार पर याचिका खारिज करने का अनुरोध किया था कि यह मुकदमा प्रार्थना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित है जो धार्मिक स्थल के स्वरूप में बदलाव पर रोक लगाता है।




