दिनांक:27/04/2026
रिपोर्ट by: संवादाता इस्तेकार चौधरी
जीएस यूनिवर्सिटी में गर्भसंस्कार कार्यशाला: एपिजेनेटिक्स और भ्रूण विकास पर विशेषज्ञों ने साझा किया ज्ञान।
हापुड़, उत्तर प्रदेश। 25 अप्रैल 2026 को जीएस यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में “प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम: एपिजेनेटिक्स एवं भ्रूण विकास” विषय पर गर्भसंस्कार कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल और प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) रुपाली शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ, जबकि जीएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज की डायरेक्टर सोनाली शर्मा और प्राचार्या प्रो. (डॉ.) भावना सिंह का विशेष सहयोग रहा।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता सारस्वत (एमबीबीएस, एमएस) ने भ्रूण विकास, जीन अभिव्यक्ति, हार्मोनल संतुलन और मातृ स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान मां का खान-पान, सोच और व्यवहार सीधे तौर पर गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है।

कार्यशाला में गर्भसंस्कार की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए “संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण” का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति के विचार और कर्म उसके व्यक्तित्व को आकार देते हैं, और यही प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। भारतीय परंपरा का उदाहरण देते हुए अभिमन्यु के प्रसंग के माध्यम से गर्भ में ही ज्ञान अर्जन की अवधारणा को समझाया गया।इस संयुक्त आयोजन में जीएस आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल और जीएस मेडिकल कॉलेज के प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग, बाल रोग, ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी तथा पीडियाट्रिक्स विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। आयुर्वेद और एमबीबीएस संकाय सदस्यों, स्नातकोत्तर छात्रों और इंटर्न्स ने उत्साहपूर्वक भाग लियाकार्यक्रम का समापन इंटरएक्टिव सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने सवाल रखे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।




