गढ़मुक्तेश्वर में कथित अवैध कॉलोनियों का बढ़ता कारोबार, कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रही प्लॉटिंग; HPDA की कार्यशैली पर उठे सवाल।

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दिनांक: 08/08/2026

हापुड़ से ब्यूरो रिपोर्ट

गढ़मुक्तेश्वर में कथित अवैध कॉलोनियों का बढ़ता कारोबार, कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रही प्लॉटिंग; HPDA की कार्यशैली पर उठे सवाल।

गढ़मुक्तेश्वर। जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में कथित अवैध कॉलोनियों और बिना स्वीकृति प्लॉटिंग का मामला एक बार फिर चर्चा में है। क्षेत्र में तेजी से विकसित होती कॉलोनियों को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर कॉलोनी में हो रही प्लॉटिंग और निर्माण गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़मुक्तेश्वर और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ समय से जमीनों पर कॉलोनी विकसित करने और प्लॉट काटकर बेचने का कारोबार तेजी से बढ़ा है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर आवश्यक विकास प्राधिकरण की अनुमति और निर्धारित नियमों का पालन किए बिना ही प्लॉटिंग की जा रही है। यदि ये आरोप सही हैं तो यह न केवल नियमानुसार विकसित की जाने वाली कॉलोनियों की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भविष्य में प्लॉट खरीदने वाले लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता है।गौर करने वाली बात यह है कि क्षेत्र में अवैध निर्माण और कॉलोनियों के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई किए जाने की खबरें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर प्राधिकरण द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई यानी पीला पंजा चलाए जाने के बावजूद यदि उसी तरह की गतिविधियां दोबारा दिखाई दे रही हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कार्रवाई के बाद निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी जमीन पर नियमों के विपरीत कॉलोनी विकसित की जा रही है तो शुरुआती स्तर पर ही संबंधित विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं होती? और अगर जानकारी होती है तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? वहीं कार्रवाई होने के बाद दोबारा उसी स्थान पर निर्माण अथवा प्लॉटिंग शुरू होने की स्थिति सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?इस पूरे मामले में हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण यानी HPDA की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्राधिकरण के सामने यह चुनौती है कि वह यह स्पष्ट करे कि गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में किन कॉलोनियों और प्लॉटिंग परियोजनाओं को नियमानुसार स्वीकृति प्राप्त है और किन स्थानों पर बिना अनुमति विकास कार्य किए जा रहे हैं। यदि कोई कॉलोनी नियमों के विपरीत विकसित की जा रही है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होना जरूरी है।

 

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर कथित अवैध प्लॉटिंग करने वालों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं कि पूर्व में कार्रवाई होने के बाद भी गतिविधियां दोबारा शुरू होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। क्या विभागीय निगरानी में कमी है, या फिर कार्रवाई के बाद प्रभावी फॉलोअप नहीं हो रहा? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।वहीं, प्लॉट खरीदने वाले लोगों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है। बिना आवश्यक अनुमति वाली कॉलोनी में जमीन खरीदने से पहले खरीदारों को संबंधित दस्तावेज, नक्शा, विकास प्राधिकरण की स्वीकृति और जमीन की वैध स्थिति की जांच कर लेना बेहद जरूरी है। केवल सड़क, बिजली या अन्य सुविधाएं दिखाई देने से किसी कॉलोनी का कानूनी रूप से स्वीकृत होना साबित नहीं होता।फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें HPDA और स्थानीय प्रशासन की ओर हैं कि वायरल वीडियो और सामने आ रही शिकायतों का संज्ञान लेकर मौके की जांच कराई जाती है या नहीं। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत होगी।हालांकि, इस रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कॉलोनाइजरों और HPDA अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।अब असली सवाल यही है—गढ़मुक्तेश्वर में कथित अवैध प्लॉटिंग का यह सिलसिला आखिर कब रुकेगा और नियमों के विपरीत कॉलोनी विकसित करने वालों पर कब होगी प्रभावी कार्रवाई?

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