बदनौली कांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सपा प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोका, मौके पर हुई नोकझोंक।

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दिनांक:11/09/2026

हापुड़ ब्यूरो रिपोर्ट

बदनौली कांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे सपा प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने रोका, मौके पर हुई नोकझोंक।

हापुड़। नगर कोतवाली क्षेत्र के गांव बदनौली में फायरिंग की घटना के दौरान युवक दीपक की मौत के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होती नजर आ रही हैं। शुक्रवार को मृतक दीपक के परिजनों से मुलाकात करने जा रहे समाजवादी पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के काफिले को पुलिस ने गांव के नजदीक रोक दिया। पुलिस की ओर से गांव की मौजूदा स्थिति और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच काफी देर तक नोकझोंक और गहमागहमी का माहौल बना रहा।बताया गया कि समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष एडवोकेट आनंद गुर्जर के नेतृत्व में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बदनौली गांव पहुंचकर मृतक दीपक के परिवार से मुलाकात करना चाहते थे। सपा नेताओं के अनुसार उनका उद्देश्य किसी तरह का राजनीतिक प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि शोकाकुल परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त करना और घटना के बाद परिवार की स्थिति की जानकारी लेना था। हालांकि, गांव में प्रवेश से पहले ही पुलिस ने प्रतिनिधिमंडल को रोक दिया।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद मौके पर सपा नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो देखते ही देखते तीखी बहस में बदल गई। सपा कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि उनका प्रतिनिधिमंडल शांतिपूर्ण तरीके से पीड़ित परिवार से मिलने जा रहा है तो उन्हें रास्ते में क्यों रोका जा रहा है। वहीं, पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता बताते हुए प्रतिनिधिमंडल को आगे नहीं जाने देने की बात कही गई।मौके पर मौजूद सपा जिलाध्यक्ष एडवोकेट आनंद गुर्जर ने कहा कि पार्टी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और दीपक के परिजनों से मिलकर उनका दुख साझा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य माहौल को प्रभावित करना नहीं, बल्कि परिवार का हाल जानना था। उन्होंने पुलिस द्वारा रास्ते में रोके जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से उठाती रहेगी।वहीं, सपा के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह चौहान ने बदनौली की घटना को गंभीर और दुखद बताते हुए कहा कि मृतक के परिवार को न्याय के साथ-साथ सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक पार्टी के नेता और कार्यकर्ता परिवार से मुलाकात कर उनका दुख बांटने जा रहे थे। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल को गांव तक पहुंचने से पहले रोक दिया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रही है और पीड़ित परिवार की आवाज को संबंधित स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद कुछ समय तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, हालांकि पूरा घटनाक्रम बातचीत और नोकझोंक तक सीमित रहा। सपा नेताओं ने पुलिस से आगे जाने की अनुमति देने की मांग की, जबकि पुलिसकर्मी अपनी ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते नजर आए।इस दौरान वरिष्ठ सपा नेता प्रताप सिंह चौहान के अलावा संजय गहलोत, शौकीन प्रधान, श्यामसुंदर भुर्जी, दीपिका, रेशमा यादव, फारुख प्रधान, अफसाना चौधरी, अख्तर मलिक, राजेश यादव, आदेश गोस्वामी, सुशांत जाटव समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।बदनौली की घटना के बाद अब पीड़ित परिवार से राजनीतिक दलों के नेताओं की मुलाकात और पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे कदम चर्चा का विषय बने हुए हैं। शुक्रवार को सपा प्रतिनिधिमंडल को रोके जाने की घटना ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना तथा पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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