उत्तर प्रदेश ग़ाज़ियाबाद: 350 करोड़ के ज़मीन घोटाले में दर्जन भर अफसर दोषी, पाँच के खिलाफ जाँच की सिफ़ारिश।

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रिपोर्ट – नाज आलम  (सोर्स एक्स प्लेटफ़ॉर्म )

 

यूपी में गाजियाबाद के 350 करोड़ के जमीन घोटाले में एक दर्जन अफसर कर्मी दोषी हैं। इनमें से पांच के खिलाफ विजलेंस जांच की सिफारिश की गई है। एसआईटी ने जांच कर शासन को भेजी रिपोर्ट में दोषी बताया है।

 

उत्तर प्रदेश ग़ाज़ियाबाद : गाजियाबाद की सिद्धार्थ विहार योजना के सेक्टर 8 में हुए 350 करोड रुपए के जमीन घोटाले में करीब एक दर्जन अफसरों कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी एसआईटी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। अब इसमें से आवास विकास परिषद के अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई है। आईएएस अफसरों के खिलाफ शासन के स्तर पर कार्रवाई होनी है।

आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने गाजियाबाद की सिद्धार्थ विहार योजना के सेक्टर 8 में एक बड़े बिल्डर को 12.047 एकड़ जमीन बिना पैसा लिए ही आवंटित कर दी थी। जमीन मिलने के बाद बिल्डर ने इस पर फ्लैट बनाकर बेच दिया। इस जमीन के घोटाले में अकेले आवास विकास के अफसर ही नहीं शामिल थे बल्कि शासन के भी कई बड़े अधिकारी शामिल थे। इन अफसरों ने बाकायदा बोर्ड से प्रस्ताव पास करा कर बिल्डर को जमीन दी थी। जमीन पर बिल्डर ने लगभग 300 फ्लैट बनाकर बेचे।

मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा के आदेश पर इसकी जांच पहले वहां के कमिश्नर व कुछ अन्य बड़े अधिकारियों ने की थी। उनकी रिपोर्ट आने के बाद शासन ने एसआईटी से जांच कराई। एसआईटी की जांच में भी घोटाले की पुष्टि हुई है। इसमें लगभग 350 करोड रुपए घोटाले की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के आने के बाद शासन हरकत में आ गया है। आवास विकास परिषद के सूत्रों का कहना है कि मामले में परिषद के पांच अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ विजलेंस जांच की सिफारिश कर दी गई है। सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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इन अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई। 


आवास आयुक्त रणवीर प्रसाद ने आवास विकास परिषद के तत्कालीन उप आवास आयुक्त एसबी सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बैजनाथ प्रसाद, प्रशासनिक अधिकारी साधु शरण तिवारी, सहायक रामचंद्र कश्यप तथा तत्कालीन सहायक अभियंता राधेलाल गुप्ता के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। इसमें से रामचंद्र कश्यप का निधन हो चुका है। बाकी अन्य सभी कर्मचारी, अधिकारी रिटायर हो चुके हैं।

6 आईएएस अफसर सहित सात अन्य भी शामिल रहे। 


इस घोटाले की फाइलों पर आवास विकास परिषद में तैनात रहे तत्कालीन तीन आवास आयुक्त के भी हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। इन अधिकारियों ने अपनी अपनी तैनाती के दौरान इसकी फाइल को मजबूत किया। बिल्डर को जमीन देने का रास्ता बनाया। एक संयुक्त आवास आयुक्त स्तर की अधिकारी का भी नाम है। जबकि एक सीएलए का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। शासन के एक बड़े अधिकारी ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि इसको बोर्ड से पास कराने में उनका सबसे अहम रोल था। इन सभी के खिलाफ शासन स्तर से ही कार्रवाई होनी है। यह सभी अफसर रिटायर हो चुके हैं।

जब बिल्डर ने फ्लैट बेच दिया तो बिक्री पर लगाई रोक। 


बिल्डर ने इस जमीन पर अपार्टमेंट की काफी लग्जरी स्कीम लॉन्च की। करोड़ों रुपए में एक-एक फ्लैट बेचे। जब सारे फ्लैट बेच कर बिल्डर फरार हो गया तब आवास विकास परिषद के अफसरों ने 12 सितंबर 2022 को बिल्डर की इस योजना में फ्लैटों की बिक्री पर रोक लगाई।

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