रिपोर्ट – नाज आलम ( सोर्स एक्स प्लेटफ़ॉर्म )
यूपी के बलरामपुर में चकबंदी अधिकारी समेत छह पर एक्शन लिया गया। धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा कोतवाली देहात में दर्ज कराया है। मामला थाना सादुल्लाह नगर के ग्राम मानीगढ़ा से सम्बन्धित है।
उत्तर प्रदेश बलरामपुर : बलरामपुर में न्यायालय में विचाराधीन पत्रावली में बिना किसी आदेश के ही चकबंदी अधिकारी व कर्मचारियों से साठगांठ करके 1979 में फर्जी आदेश की नकल जारी करा ली गई। फर्जी आदेश के आधार पर 44 साल बाद जुलाई 2023 में कूटरचना करने वालों ने जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। आदेश को राजस्व परिषद की बेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किया गया। एक पखवारा पहले पीड़ित पक्ष ने जनता दर्शन में डीएम से शिकायत की जिस पर डीएम ने एडीएम व अपर एसडीएम की दो सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच कराई। प्रकरण में कूटरचना कर फर्जी आदेश जारी करने की बात सामने आई जिस पर तत्कालीन चकबंदी अधिकारी सहित छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा कोतवाली देहात में दर्ज कराया है। मामला थाना सादुल्लाह नगर के ग्राम मानीगढ़ा से सम्बन्धित है।
तहसील उतरौला के थाना सादुल्लाह नगर क्षेत्र के ग्राम मानीगढ़ा निवासी मुन्नू ने अपनी जमीन गांव में मदरसे के नाम कर दी थी। इससे असंतुष्ट उनके भाई जाफर ने चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में मुकदमा दायर किया। मुन्नू ने मदरसे के जिम्मेदारों व चकबंदी विभाग में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों से मिली भगत करके वर्ष 1979 में फजी तरीके से एक आदेश पारित करा लिया। तत्कालीन चकबंदी अधिकारी व उनके अधीनस्थों ने पत्रावली में बिना आदेश पारित हुए ही मैनुअल तरीके से फर्जी आदेश की नकल भी जारी कर दी। वर्ष 1979 से अब तक कूटरचना करने वालों ने मामले को दबाए रखा। इसी बीच जाफर की मृत्यु हो गई। जुलाई 2023 में जाफर के लड़कों अब्दुल खलील व अब्दुल सलीम व मजीदुन्निशा पत्नी स्व. जाफर ने फर्जी तरीके से जारी किए गए नकल के आधार पर मृतक व्यक्ति के नाम पुन: जमीन कराने का आदेश पारित करा लिया। जानकारी होने पर पीड़ित पक्ष ने एक पखवारा पहले डीएम अरविंद सिंह से जनता दर्शन में शिकायत की जिस पर जिलाधिकारी ने एडीएम प्रदीप कुमार व अपर एसडीएम संतोष कुमार ओझा को मामले की जांच सौंपी।

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मैनुअल तरीके से आदेश किया था पारित
अपर एसडीएम संतोष कुमार ओझा ने बताया कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारी शिव मूरत सिंह एवं उनके न्यायालय के पेशकार महेन्द्र गुप्ता, संग्रह अनुसेवक राम पुजारी ने कूटरचना करने वालों से साठगांठ करके वर्ष 1979 में मूल पत्रावली में बिना कोई आदेश परित हुए ही मैनुअल तरीके से आदेश निर्गत कर दिया। आदेश को राजस्व परिषद की बेवसाइट पर भी अपलोड नहीं किया गया और 44 साल बाद मृतक व्यक्ति के नाम अभिलेखागार से आदेश की फर्जी नकल भी जारी कर दी गई जिसके आधार पर कूटरचना करने वाले अब्दुल खलील, अब्दुल सलीम व मजीदुन्निशा ने जमीन अपने नाम दर्ज करा ली।
सिद्धार्थनगर में बंदोबस्त अधिकारी के पद पर तैनात हैं शिव मूरत सिंह
एडीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि जांच में तत्कालीन चकबंदी अधिकारी शिव मूरत सिंह, न्यायालय के पेशकार महेन्द्र गुप्ता व संग्रह अनुसेवक राम पुजारी संलिप्त पाए गए। इसके अलावा अब्दुल सलीम, अब्दुल खलील व मजीदुन्निशा को कूटरचना का आदेश जारी कराने में दोषी पाया गया है। इन सभी लोगों के खिलाफ कोतवाली देहात में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारी शिव मूरत सिंह कुशवाहा वर्तमान में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सिद्धार्थनगर के पद पर तैनात हैं। उनके खिलाफ शासन को चार्जशीट भेजी जा रही है।
बलरामपुर डीएम अरविंद सिंह ने बताया कि भ्रष्टाचार की शिकायत जनता दर्शन में मिली थी। टीम गठित कर जांच कराई गई। शिकायत सत्य मिलने पर तत्कालीन चकबंदी अधिकारी सहित छह लोगों के खिलाफ एफआईआर पंजीकृत कराया गया है। प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों की जांच कराई जा रही है। इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।




