रिपोर्ट / नाज आलम ( सोर्स एक्स प्लेटफ़ॉर्म )
कोल्हान यूनिवर्सिटी (केयू) एकबार फिर चर्चा के केंद्र में है। दरअसल राजनीति विज्ञान के स्नातक (यूजी) के सेमेस्टर-2 की परीक्षा में एक ऐसा सवाल पूछ दिया गया जिससे माहौल गरमा गया है।
राँची झारखंड : कोल्हान यूनिवर्सिटी (केयू) में राजनीति विज्ञान में स्नातक (यूजी) के सेमेस्टर-2 की परीक्षा में एक सवाल ने छात्रों को हैरान कर दिया। सेमेस्टर 2 के प्रश्नपत्र में तीसरे प्रश्न में पूछा गया था कि ‘गोदी मीडिया’ क्या है और वे इसके बारे में क्या समझते हैं। इस घटना को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों के बीच आक्रोश देखा जा रहा है। घटनाक्रम से जुड़े लोगों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
बताया जाता है कि इस सवाल ने छात्रों को उलझा दिया। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे ऐसे सवाल का क्या जवाब दें। कुछ छात्रों ने इसका उत्तर दिया, जबकि कई ने प्रश्न ही छोड़ दिया। एक परीक्षार्थी वरुण ने सोमवार को मीडिया को बताया- मैंने सवाल छोड़ दिया क्योंकि मैं समझ नहीं पा रहा था कि इसका जवाब क्या लिखूं।
एक अन्य छात्र राहुल ने कहा कि उन्होंने लिखा, ‘गोदी मीडिया वह है जो सरकार की गोद में है, चाहे वह केंद्र या राज्य सरकार की गोद में हो। ऐसा मीडिया जो सरकारों के पक्ष में रिपोर्ट पेश करता है वह गोदी मीडिया है।’ सोनाली पाठक ने बताया कि उन्होंने लिखा- मीडिया जो सरकार के नियंत्रण में है और केवल उपलब्धियां लिखता है और गलतियों को छुपाता है, वह गोदी मीडिया है।

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इसको लेकर विवाद बढ़ रहा है। वहीं कोल्हान यूनिवर्सिटी (केयू) के रजिस्ट्रार और डीन (अकादमी) डॉ. राजेंद्र भारती ने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की ओर से मंजूरी के बाद इस टॉपिक को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया था। ‘गोदी मीडिया’ और ‘शहरी नक्सलवाद’ जैसे टॉपिक विभागीय अध्ययन बोर्ड की ओर से विकसित और अनुशंसित किए गए थे। ये पिछले एक साल से पढ़ाए जा रहे हैं।
‘इलेक्टोरल कैम्पेन एंड इश्यू ऑफ फेक न्यूज, राइज ऑफ गोदी मीडिया इंफ्लुएंस ऑन इलेक्टोरेट’ का विषय पहली बार 2022-26 के सत्र में चार साल के यूजी पाठ्यक्रम के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत झारखंड के किसी विश्वविद्यालय में लाया गया है। अब यह मामला तूल पकड़ रहा है। एबीवीपी कोल्हान के संगठन सचिव प्रताप सिंह ने केयू रजिस्ट्रार के पास इसको लेकर शिकायत दर्ज कराई है।
वहीं कोल्हान यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अजय चौधरी ने कहा कि यह प्रश्न केयू और राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के शिक्षकों द्वारा तैयार किया गया है। इस प्रकार के सवालों से बचा जा सकता था। ऐसा करना बेहतर होता। एबीवीपी कोल्हान विश्वविद्यालय के संगठन सचिव प्रताप सिंह ने बताया कि रजिस्ट्रार ने हमें मामले को देखने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। इस सवाल के पीछे सियासत से प्रेरित कुछ प्रोफेसर हैं।
प्रताप सिंह ने कहा- गोदी मीडिया शब्द विपक्षी दलों द्वारा गढ़ा गया है। यह कौन तय करेगा कि कौन गोदी मीडिया है और कौन नहीं। बाकी मीडिया क्या कहलाएगा। एक या दो व्यक्ति भ्रष्ट हो सकते हैं, लेकिन पूरे मीडिया को बदनाम किया जा रहा है। क्या पूरी मीडिया बिरादरी गलत है। वहीं एनएसयूआई झारखंड समन्वयक प्रभजोत सिंह ने कहा कि इस सवाल के जवाब से पता चल जाएगा कि देश का युवा मीडिया के बारे में सोच रहा है।




