हापुड़ का रामलीला ग्राउंड साप्ताहिक बाज़ार: गरीब परिवारों की रोज़ी-रोटी का प्रमुख सहारा।

SHARE:

हापुड़ का रामलीला ग्राउंड साप्ताहिक बाज़ार: गरीब परिवारों की रोज़ी-रोटी का प्रमुख सहारा।

रिपोर्टर: जगदीश माकन, स्टार भारत न्यूज़ 24
स्थान: हापुड़, उत्तर प्रदेश
तारीख: 7 दिसंबर 2025

साप्ताहिक बाज़ार में गरीब तबके की भीड हापुड़ के रामलीला ग्राउंड का दौरा किया, जहां हर सप्ताह की तरह इस रविवार भी साप्ताहिक बाज़ार की रौनक देखने को मिली। यह बाज़ार गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होता है, क्योंकि यहां उन्हें रोज़मर्रा की जरूरतों का सामान सस्ती कीमतों पर आसानी से मिल जाता है।

छोटे विक्रेताओं की आर्थिक रीढ़

यहां दुकान लगाने वाले अधिकतर छोटे व्यापारी और कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के लोग हैं। उनका कहना है कि सप्ताह में लगने वाला यह बाज़ार ही उनके परिवार के खर्चों को पूरा करता है। एक दिन की कमाई ही उनके घर की रोशनी बनाए रखती है।

किफायती दामों पर जरूरी सामान

बाज़ार में कपड़े, फुटवियर, बच्चों के खिलौने, घरेलू सामान, सब्ज़ियां और दूसरी दैनिक जरूरत की वस्तुएं बेहद कम दाम पर उपलब्ध थीं।कई ग्राहकों ने बताया कि बड़े बाजारों की तुलना में यहां का सामान उनकी जेब के लिए अधिक अनुकूल है, इसलिए वे हर सप्ताह यहां खरीदारी करने आते हैं।

भीड़, जाम और सफाई की चुनौतियाँ

बाज़ार की लोकप्रियता जितनी बढ़ी है, उससे ज्यादा समस्याएँ भी बनी हुई हैं। पार्किंग की कमी, ट्रैफिक जाम, फुटपाथ पर भीड़ और सफाई व्यवस्था कमजोर होने से लोगों और दुकानदारों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन थोड़ी व्यवस्था सुधार दे, तो यह बाज़ार और भी बेहतर और सुरक्षित हो सकता है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था की धड़कन

हापुड़ का यह साप्ताहिक बाज़ार सिर्फ खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं है, बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की जरूरतों का सबसे बड़ा आधार है। इसके साथ ही यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देता है।लोगों को उम्मीद है कि आगे चलकर प्रशासन और सुविधाएँ बढ़ाएगा ताकि यह बाज़ार और भी व्यवस्थित और उपयोगी बन सके।

स्टार भारत न्यूज़ 24 की रिपोर्ट।

Read More