दिनांक:25/03/2026
रिपोर्ट by: संवादाता इस्तेकार चौधरी
विश्व क्षय रोग दिवस 2026 पर SIMS हापुड़ का जागरूकता अभियान, गांव में कैंप और नुक्कड़ नाटक से दिया टीबी उन्मूलन का संदेश।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में विश्व क्षय रोग दिवस 2026 के अवसर पर सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ द्वारा एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा मुकिमपुर गांव और सिम्स के ओपीडी परिसर में किया गया।इस वर्ष की वैश्विक थीम “हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं: देशों के नेतृत्व में, लोगों की शक्ति से” के अनुरूप आयोजित इस अभियान का उद्देश्य आम जनता को क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूक करना, इसके लक्षणों की समय पर पहचान, रोकथाम और पूर्ण उपचार के महत्व को समझाना था। साथ ही, टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम का संचालन सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. (ब्रिग.) विनीत रस्तोगी के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें डॉ. विनय कुमार (टीबी नोडल अधिकारी) और डॉ. सिनीश टी. वी. (सीनियर रेजिडेंट) ने नेतृत्व किया। फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों और एमबीबीएस छात्रों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।मुकिमपुर गांव में आयोजित चिकित्सा शिविर में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई और उन्हें टीबी के लक्षण, जांच प्रक्रिया और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया, जिससे संभावित मरीजों की पहचान और उन्हें समय पर परामर्श देने में मदद मिली।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एमबीबीएस 2023 और 2024 बैच के छात्रों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। यह नाटक गांव और ओपीडी परिसर दोनों जगह आयोजित किया गया, जिसमें टीबी के संक्रमण, देर से जांच के दुष्परिणाम और इलाज पूरा करने के महत्व को सरल और प्रभावी तरीके से दर्शाया गया।

ओपीडी गतिविधियों का संचालन पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सचेत डावर के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित स्वास्थ्य वार्ता में डॉ. विनय कुमार ने टीबी के शुरुआती लक्षण जैसे लगातार खांसी, वजन घटना और बुखार की पहचान पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि टीबी की जांच और इलाज सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत निशुल्क उपलब्ध है और पूरा इलाज करना बेहद जरूरी है, ताकि दवा प्रतिरोध जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. अरशद, डॉ. सानोजा श्रेया, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. ललित सहित अन्य टीम सदस्यों और सहयोगी स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम में व्यापक जनसहभागिता देखने को मिली।कार्यक्रम के अंत में आम जनता से अपील की गई कि वे टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच कराएं और इलाज पूरा करें, ताकि टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।सिम्स प्रबंधन ने इस सामाजिक पहल की सराहना करते हुए आयोजन टीम को बधाई दी। संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों और सरस्वती समूह के नेतृत्व ने भी इस अभियान को जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।यह पहल न केवल स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने में सफल रही, बल्कि यह भी संदेश देती है कि टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों और समाज की संयुक्त भागीदारी बेहद जरूरी है।




