पेड़ों पर बैग में कैद हो रहे आम, गुणवत्ता बढ़ाने की आधुनिक तकनीक बनी किसानों और व्यापारियों की पहली पसंद।

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दिनांक:30/05/2026

रिपोर्ट by: संवादाता गुलफाम सैफी

पेड़ों पर बैग में कैद हो रहे आम, गुणवत्ता बढ़ाने की आधुनिक तकनीक बनी किसानों और व्यापारियों की पहली पसंद।

गढ़मुक्तेश्वर/बहादुरगढ़। आम के बागानों में इन दिनों एक नया और दिलचस्प नजारा देखने को मिल रहा है। पेड़ों पर लटकते आम अब खुले नहीं दिखाई दे रहे, बल्कि उन्हें कागज या विशेष प्रकार के बैग से ढक दिया गया है। पहली नजर में यह दृश्य लोगों को हैरान कर सकता है, लेकिन इसके पीछे आम की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने की एक आधुनिक कृषि तकनीक छिपी हुई है। इस तकनीक को “बैगिंग” कहा जाता है, जो धीरे-धीरे क्षेत्र के आम उत्पादकों और व्यापारियों के बीच लोकप्रिय होती जा रही है।गढ़ तहसील के गांव पलवाड़ा सहित बहादुरगढ़ क्षेत्र के कई बागानों में आमों की बैगिंग का कार्य बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। बागवानों और व्यापारियों का मानना है कि इस तकनीक से आमों की बाहरी गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। बैगिंग के दौरान पेड़ पर लगे प्रत्येक आम को एक विशेष कागज या बैग से ढक दिया जाता है, जिससे फल सीधे धूप, धूल, बारिश और विभिन्न प्रकार के कीटों के संपर्क में नहीं आता।

आम व्यापारियों के अनुसार बैगिंग तकनीक अपनाने से आमों पर दाग-धब्बे कम पड़ते हैं और उनका प्राकृतिक रंग तथा चमक बरकरार रहती है। बाजार में आकर्षक दिखने वाले फलों की मांग अधिक होती है, जिसके कारण ऐसे आमों को सामान्य फलों की तुलना में बेहतर कीमत मिलती है। विशेष रूप से निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले आमों में इस तकनीक का उपयोग काफी बढ़ रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता और सुंदरता को विशेष महत्व दिया जाता है।कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बैगिंग तकनीक केवल फल की सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्पादन को अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक बनाने में भी सहायक है। जब फल बैग से ढका रहता है तो उस पर कीटों और रोगों का प्रभाव कम पड़ता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों और दवाओं का उपयोग भी कम करना पड़ता है। इससे फल में रासायनिक अवशेषों की मात्रा घटती है और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित उत्पाद प्राप्त होता है।

हालांकि बैगिंग की प्रक्रिया आसान नहीं मानी जाती। इसमें प्रत्येक फल को अलग-अलग बैग से ढकना पड़ता है, जिसके लिए अतिरिक्त श्रम और समय की आवश्यकता होती है। साथ ही बैग और अन्य सामग्री पर भी खर्च बढ़ता है। इसके बावजूद किसान और व्यापारी इसे लाभदायक निवेश मान रहे हैं क्योंकि बेहतर गुणवत्ता वाले आमों को बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं, जिससे लागत की भरपाई आसानी से हो जाती है।बारह बस्ती की फल बेल्ट के रूप में प्रसिद्ध बहादुरगढ़ क्षेत्र में आम उत्पादन लंबे समय से किसानों की आय का प्रमुख स्रोत रहा है। अब आधुनिक कृषि तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ यहां के बागवान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर गुणवत्ता आधारित उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। बैगिंग तकनीक इसी बदलाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर रही है।कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक और अधिक लोकप्रिय होगी। यदि किसानों को उचित प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिलती रही तो क्षेत्र के आम राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। बैगिंग तकनीक के बढ़ते प्रयोग ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक खेती के जरिए किसान कम संसाधनों में भी बेहतर गुणवत्ता और अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं।

स्टार भारत न्यूज़ 24 की रिपोर्ट।

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