रविंद्र चौधरी के नेतृत्व में पीरनगर में प्रस्तावित स्कूल शिफ्टिंग का विरोध, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन।

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दिनांक:18/03/2026

रिपोर्ट by: संवादाता जगदीश माकन

रविंद्र चौधरी के नेतृत्व में पीरनगर में प्रस्तावित स्कूल शिफ्टिंग का विरोध, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन।ग्रामीणों के साथ उठी आवाज, बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने का जताया खतरा, फैसले पर पुनर्विचार की मांग।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद के ग्राम पंचायत पीरनगर में प्रस्तावित सरकारी विद्यालय को अन्य स्थान पर स्थानांतरित किए जाने के निर्णय के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे ने अब व्यापक रूप ले लिया है, जहां ग्रामीणों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ रहे हैं।इस पूरे मामले में क्षेत्र के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रविंद्र चौधरी ने नेतृत्व संभालते हुए ग्रामीणों की आवाज को मजबूती दी है। उन्होंने न केवल इस निर्णय का विरोध किया, बल्कि संगठित रूप से ग्रामीणों और आसपास के गांवों के प्रधानों के साथ मिलकर जिला प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा।


ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से साफ तौर पर मांग की गई है कि पीरनगर में प्रस्तावित विद्यालय को किसी भी परिस्थिति में अन्य स्थान पर स्थानांतरित न किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय लंबे समय से क्षेत्र की जरूरत रहा है और इसके बनने से आसपास के बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे।रविंद्र चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विद्यालय का स्थानांतरण सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। उनका कहना है कि यदि स्कूल को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जाता है, तो छोटे बच्चों को लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ेंगी।


उन्होंने आगे बताया कि जिस स्थान पर विद्यालय को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है, वहां पहले से ही इंटर कॉलेज जैसी शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में पीरनगर और उसके आसपास के गांवों के बच्चों के लिए अलग से स्कूल की आवश्यकता को नजरअंदाज करना एकतरफा निर्णय प्रतीत होता है।ग्रामीणों ने भी इस फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूल का निर्माण पीरनगर में ही होना चाहिए, ताकि गांव के बच्चों को अपने ही क्षेत्र में शिक्षा मिल सके। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए।


ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया, तो वे आगे और बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल, गांव में इस मुद्दे को लेकर माहौल गरमाया हुआ है और लोग प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास योजनाओं में स्थानीय जरूरतों और जनभावनाओं को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है या नहीं।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या पीरनगर के बच्चों को उनके गांव में ही शिक्षा की सुविधा मिल पाएगी या नहीं।

स्टार भारत न्यूज़ 24 की रिपोर्ट।

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