90 वर्ष की आयु में हज़रत मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब का इंतकाल, लाखों नमाज़ियों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई।

SHARE:

दिनांक:04/04/2026

रिपोर्ट by: संवाददाता गुलफाम सैफी

90 वर्ष की आयु में हज़रत मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब का इंतकाल, लाखों नमाज़ियों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई।मेरठ। दीन-ए-इस्लाम की दुनिया से एक बेहद सम्मानित और प्रभावशाली शख्सियत मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब के इंतकाल की खबर ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, जिससे उनके चाहने वालों और शागिर्दों में शोक की लहर दौड़ गई। उन्हें इल्म, सादगी और रहनुमाई का प्रतीक माना जाता था।अजराड़ा से ताल्लुक रखने वाले मौलाना साहब ने अपनी पूरी जिंदगी दीन की खिदमत, इंसानियत की भलाई और समाज को सही राह दिखाने में गुज़ार दी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों मदरसों को उनकी सरपरस्ती हासिल थी, जहां से बड़ी संख्या में तलबा ने तालीम हासिल कर समाज में अपनी पहचान बनाई। उनके इंतकाल को एक ऐसे दौर का अंत माना जा रहा है, जिसने इल्म और अखलाक की मजबूत नींव रखी।

मौलाना अब्दुल्ला मुगैसी साहब का पलवाड़ा स्थित मदरसे से विशेष जुड़ाव रहा। वह समय-समय पर यहां आते रहते थे और स्थानीय लोगों के बीच उनका गहरा सम्मान था। उनकी मौजूदगी से इलाके में एक अलग ही रौनक और रूहानी माहौल बना रहता था।बताया जाता है कि मौलाना साहब मूल रूप से घघराला गांव के निवासी थे। उनके इंतकाल के बाद नमाज़-ए-जनाज़ा में दूर-दराज़ से लाखों लोगों ने शिरकत की। अंतिम दीदार के लिए उमड़ी भीड़ इस बात की गवाही दे रही थी कि उन्होंने लोगों के दिलों में कितनी गहरी जगह बनाई थी। इस दौरान सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां और किसान संगठनों के नेता भी मौजूद रहे।

हर आंख नम और हर दिल गमगीन था। लोग नमाज़-ए-जनाज़ा के दौरान उनके लिए मग़फिरत की दुआ करते नजर आए। मौलाना साहब की दी हुई तालीम, उनकी सादगी और इंसानियत के लिए किए गए कार्य हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए और उनके परिवार व चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।

Read More