दिनांक:26/02/2026
रिपोर्ट by: संवाददाता इस्तेकार चौधरी
पिलखुवा के जी.एस. विश्वविद्यालय में जीसीपी पर विस्तृत कार्यशाला, नैदानिक अनुसंधान में नैतिकता पर विशेष जोर।
पबला रोड पिलखुवा में 25 फरवरी को गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (GCP) विषय पर एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोधकर्ताओं, चिकित्सकों एवं पीजी छात्रों को नैदानिक अनुसंधान से जुड़े नैतिक, वैज्ञानिक और विधिक मानकों के प्रति जागरूक करना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. मोनिका शर्मा, डॉ. सुरभि गुप्ता, डॉ. कुलदीप गोगिया, संकायाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गर्ग, औषध विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना शर्मा, डॉ. शिप्रा कौशिक एवं डॉ. रजनी रॉय द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

जीसीपी की महत्ता पर विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत में औषध विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने उपस्थित पीजी छात्रों एवं प्रतिभागियों को जीसीपी के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त दिशा-निर्देशों का समूह है, जो यह सुनिश्चित करता है कि मानव प्रतिभागियों पर होने वाला शोध सुरक्षित, नैतिक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणिक हो।हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप गोगिया ने नैदानिक अनुसंधान में चिकित्सकों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शोध कार्य केवल वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है।

राष्ट्रीय दिशा-निर्देश और कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश
औषध विज्ञान विभाग की प्राध्यापक डॉ. शिप्रा कौशिक ने नेशनल एथिकल गाइडलाइंस के प्रमुख बिंदुओं को समझाया। उन्होंने शोध के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोपरि बताया।सुभारती मेडिकल कॉलेज की औषध विभागाध्यक्ष डॉ. सुरभि गुप्ता ने एनडीसीटी नियम 2019 की मुख्य विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये नियम क्लिनिकल ट्रायल्स को नियंत्रित करने और पारदर्शिता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।सहायक प्राध्यापक डॉ. रजनी कुमारी रॉय ने सूचित सहमति (Informed Consent) और गोपनीयता के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी शोध में प्रतिभागी की स्वैच्छिक सहमति और उसकी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा अनिवार्य है।

आयोजन में टीमवर्क की भूमिका
कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. अपूर्वा गुप्ता, डॉ. श्रेष्ठा और मुस्कान वैद्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी समन्वित भूमिका से कार्यशाला सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।समापन सत्र में संकायाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार गर्ग ने सभी वक्ताओं एवं आयोजन समिति को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के ज्ञानवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अंत में औषध विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भविष्य में भी इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।कार्यशाला में बड़ी संख्या में पीजी छात्र, शोधार्थी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।





