दिनांक:14/03/2026
रिपोर्ट by: संवाददाता इस्तेकार चौधरी
हापुड़: सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में नवजात शिशुओं की जीवनरक्षा पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित।
अनवरपुर, हापुड़ स्थित सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल के कॉलेज ऑडिटोरियम में नवजात शिशुओं की देखभाल और जीवनरक्षा से जुड़े कौशल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बेसिक नियोनेटल रेससिटेशन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशुओं की आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उन नवजात शिशुओं की जान बचाने से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण देना था, जिन्हें जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में कठिनाई होती है। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने नवजात शिशु के प्रारंभिक मूल्यांकन, वायुमार्ग प्रबंधन, प्रभावी वेंटिलेशन और नवजात को स्थिर करने की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और नेशनल नियोनैटोलॉजी फोरम द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया।

कार्यशाला का संचालन सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश कुमार गोयल के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को नवजात आपात स्थितियों से निपटने के आधुनिक तरीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया।इस प्रशिक्षण में कई प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। इनमें के.एस.जी.एम.सी. मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. ब्रजेंद्र सिंह, मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष अग्रवाल, एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. अनुपमा वर्मा तथा टी.एम.यू. मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विवेक त्यागी शामिल रहे। विशेषज्ञों ने सैद्धांतिक सत्रों के साथ-साथ सिमुलेशन आधारित डेमोंस्ट्रेशन और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण कौशल सिखाए।

कार्यक्रम में बाल रोग विभाग के फैकल्टी सदस्यों, स्नातकोत्तर छात्रों, इंटर्न्स, जूनियर डॉक्टरों के साथ-साथ प्रसव सेवाओं और नवजात देखभाल से जुड़े नर्सिंग स्टाफ तथा स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इंटरैक्टिव व्याख्यान और प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को नवजात आपात स्थितियों के प्रभावी प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर और प्रभावी नियोनेटल रेससिटेशन नवजात मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष रूप से जन्म के समय होने वाली श्वास अवरोध और श्वसन कष्ट जैसी स्थितियों में यह प्रशिक्षण जीवनरक्षक साबित हो सकता है। स्वास्थ्यकर्मियों को इन कौशलों का प्रशिक्षण देने से नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उनके समुचित विकास की संभावना बढ़ जाती है।

इस अवसर पर सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन और वाइस चेयरपर्सन सुश्री रम्या रामचंद्रन ने आयोजन टीम और प्रतिभागियों को सफल कार्यशाला के लिए बधाई दी।साथ ही डीन एवं प्रिंसिपल डॉ. बरखा गुप्ता, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, जनरल मैनेजर एन. वर्धराजन और डायरेक्टर रघुवर दत्त ने बाल रोग विभाग की पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और जीवनरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास को बढ़ावा देते हैं, बल्कि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और नवजात शिशुओं की जीवनरक्षा दर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।




